जानें कहां हुई देश के सबसे बड़े स्वदेशी परमाणु संयंत्र की शुरुआत, क्या है इसकी खासियत!

भारत ने हासिल किया एक और मुकाम

गुजरात में पहले सबसे बड़े स्वदेसी परमाणु ऊर्जा संयंत्र की शुरूआत

काकरापार परमाणु ऊर्जा परियोजना भारत की सफलता का मील का पत्थर

अंतरिक्ष, विज्ञान, उद्योग, संस्कृति और न जानें कितने ही क्षेत्रों में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। जल्द ही हम दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में टॉप पर होंगे। क्योंकि भारत ने दुनिया में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है। उपलब्धियों की कड़ी में गुजरात के काकरापार में शुरू हुए भारत के सबसे बड़ परमाणु संयंत्र का भी नाम जुड़ गया है, जिसकी शुरूआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की है। इस परमाणु संयंत्र की खास बात ये है कि ये भारत का पहला और पूर्णत: स्वदेशी संयंत्र है जो भारत का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र भी है। भारत के पहले स्वदेशी रूप से विकसित परमाणु ऊर्जा संयंत्र की क्षमता 700 मेगावाट है। काकरापार परमाणु ऊर्जा परियोजना (केएपीपी) के रिएक्टर ने 30 जून को कमर्शियल ऑपरेशन की शुरूआत कर दी है। ये अब तक अपनी 90 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रहा था।

खास है काकरापार परमाणु ऊर्जा संयंत्र यूनिट-3

प्रधानमंत्री मोदी ने इंटरनेट मीडिया एक्स पर पोस्ट कर ये बताया कि भारत ने एक और मुकाम हासिल किया है। गुजरात में पहला सबसे बड़ा स्वदेशी 700 मेगावाट काकरापार परमाणु ऊर्जा संयंत्र यूनिट-3 पूरी क्षमता पर परिचालन शुरू हो चुका है। खास बात ये है कि न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआइएल) काकरापार में 700 मेगावाट के दो दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) का निर्माण हो रहा है।


कंस्ट्रक्शन्स ऑफ न्यूक्लियर पॉवर प्लान्ट

इस संयत्र में 220 मेगावाट के दो बिजली संयंत्र भी हैं। इसके अलावा, एनपीसीआइएल ने देश भर में सोलह 700 मेगावाट पीएचडब्ल्यूआर बनाने की योजना भी तैयार की है। इसके लिए फाइनेंशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव मंजूरी भी मिल गई है। इनमें से राजस्थान के रावतभाटा (आरएपीएस 7 और 8) और हरियाणा के गोरखपुर (जीएचएवीपी 1 और 2) में 700 मेगावाट के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण काम हो रहा है। 


इसके साथ ही सरकार ने दूसरी चार जगहों हरियाणा में गोरखपुर, मध्य प्रदेश में चुटका, राजस्थान में माही बांसवाड़ा और कर्नाटक में कैगा में बेड़े मोड में 10 स्वदेशी रूप से विकसित पीएचडब्ल्यूआर के निर्माण को भी मंजूरी दी है।
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Dr. Kirti Sisodia

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