Tiger Boy Chendru: चेंदरू मंडावी को क्यों कहते हैं बस्तर का मोगली?

Tiger Boy Chendru: आपने इंसान और कुत्ते की दोस्ती सुनी होगी, इंसान और गाय की दोस्ती भी सुनी होगी, लेकिन क्या आपने कभी एक शेर और इंसान की दोस्ती के बारे में सुना है। सुना भी होगा तो कहानियों में। लेकिन हम यहां आपको एक ऐसे इंसान के बारे में बता रहे हैं जो असल जीवन में एक शेर का दोस्त था, उसके साथ खेलता, खाता, नहाता, मस्ती करता और सोता था। जी हां हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के मोगली या टाइगर बॉय के नाम से मशहूर चेंदरू की। आइए जानते हैं कैसे एक शेर और इंसान की दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि पूरा विश्व उन्हें पहचानने लगा।

बचपन से साथ रहे चेंदरू और टेम्बू

चेंदरू मंडावी बस्तर के नारायणपुर जिले के गढ़बेंगाल गांव के रहने वाले थे। आदिवासी परिवार में पले बढ़े चेंदरू के पिता और दादा शिकारी थी। एक दिन चेंदरू के पिता और दादा जंगल से इस छोटे शेर के बच्चे को टोकरी में भरकर लाए। चेंदरू ने उसे अपने दोस्त बना लिया और उसे टेम्बू नाम दिया। टेम्बू के बड़े होने के बाद भी चेंदरू और टेम्बू की दोस्ती नहीं बदली। जहां लोग शेर को देखकर कांपते हैं वहीं चेंदरू टेम्बू के साथ दोस्त की तरह खेतला था। चेंदरू और टेम्बू की तस्वीरें सिर्फ देश ही नही विदेशों तक में फैल चुकी थी।

चेंदरू पर बनी फिल्म ने जीता ऑस्कर

1957 में चेंदरू पर हॉलीवुड ने फिल्म बनाई गई थी इस फिल्म ने उस समय ऑस्कर जीता था। तब चेंदरू की उम्र केवल 10 वर्ष की थी। फिल्म में आदिवासी बच्चे चेंदरू और एक शेर की दोस्ती की कहानी दिखाई गई थी। फिल्म का नाम ‘द जंगल सागा’ है फिल्म का निर्माण जिसे मशहूर स्वीडन फिल्मकार अरेन सक्सडॉर्फ ने किया था। 75 मिनट की इस फिल्म ने चेंदरू को पूरी दुनिया में पहचान दिला दी। लोग दूर-दूर से चेंदरू और उसके शेर के साथ फोटो खिंचाने के लिए बस्तर पहुंचते थें।

78 साल में हुई चेंदरू की मृत्यु

चेंदरू और टेम्बू साथ-साथ बड़े हुए, जवान हुए और फिर साथ-साथ बूढ़े होन लगे। चेंदरू पर फिल्म बनाने वाले डायरेक्टर उसे अपने साथ स्वीडन ले गए थे। जब चेंदरू वहां वापस लौटे उसके कुछ दिनों के बाद टेम्बू की मौत हो गई। अपने भाई जैसे दोस्त के जाने से चेंदरू भी गुमसुम रहने लगे उनका स्वास्थ्य भी बिगड़ने लगा। टेम्बू के जान के कुछ दिनों केबाद ही 2013 में 78 साल की उम्र में चेंदरू की भी मौत हो गई।

अमर हो गई चेंदरू और टेम्बू की कहानी

टेम्बू और चेंदरू दोनों ही इस दुनिया से चले गए, लेकिन उनकी दोस्ती की कहानी अमर हो गई। आज भी बस्तर में, छत्तीसगढ़ के टाइगर ब्वॉय और छत्तीसगढ़ के मोगली की कहानी बच्चों को सुनाई जाती है। टेम्बू और चेंदरू की याद में रायपुर जंगल सफारी में उनकी स्टैच्यू लगाई गई है। इतना ही नहीं नारायणपुर में चेंदरू के से एक पार्क भी बनाया गया है।

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Rishita Diwan

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