Ram Van Gaman Path: छत्तीसगढ़ के इन जगहों से गुजरे थे भगवान राम!

Ram Van Gaman Path: भगवान विष्णु के सातवें अवतार के रूप में पूजे जाते हैं प्रभु श्री राम। वो ईश्वर के ऐसे रूप हैं जिनका जीवन आदर्श, मर्यादा और धर्म का प्रतीक है। उनके चरित्र को “मर्यादा पुरुषोत्तम” कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने हर परिस्थिति में धर्म और सत्य का पालन किया। रामायण महाकाव्य में उनके जीवन गाथा, वनवास, रावण का वध का वर्णन किया गया है जो एक आदर्श राजा, पुत्र, पति और भाई की छवि प्रस्तुत करती है। भगवान राम आत्मसात करने के लिए लोग अयोध्या के भव्य राम मंदिर पहुंचते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं छत्तीसगढ़ में भी कुछ ऐसी जगहें हैं जहां भगवान राम ने वनवास के दौरान अपना समय बिताया।

राम वन गमन पथ

‘राम वन गमन पथ’ छत्तीसगढ़ में ऐसी जगहें हैं जहां से भगवान राम गुजरे थे। छत्तीसगढ़ राज्य सरकार इस प्राचीन पथ को पुनर्जीवित करने का काम कर रही है। ताकि लोग इन पवित्र स्थलों से भगवान राम को महसूस कर सकें और श्री राम के वनवास काल की स्मृतियों को संजोया जा सके। राम वन गमन पथ उन मार्गों से होकर गुजरता है, जहां-जहां भगवान राम के चरण पड़े थे।

राम यात्रा मार्ग का प्रतीक

देशभर में 2 हजार 260 किमी लंबा यह पथ भगवान राम के यात्रा मार्ग का प्रतीक है, जिसका सबसे बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ से होकर गुजरता है। यह पथ न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि राज्य में पर्यटन विकास की संभावनाओं को भी प्रोत्साहित कर रहा है।

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से शुरू होकर सुकमा जिले तक की 528 किमी लंबी यात्रा राम वन गमन पथ का हिस्सा है। इस यात्रा के दौरान राज्य के नौ प्रमुख स्थल भगवान राम की स्मृतियों से जुड़े हुए हैं, जिन्हें पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जा रहा है। सरकार की योजना है कि राज्य के इन 75 स्थलों को संवारकर एक नए धार्मिक-पर्यटन सर्किट के रूप में प्रस्तुत किया जाए। जिससे यहां की सांस्कृतिक धरोहर को संजोया जा सके। जानते हैं कौन से हैं वो 9 स्थल

सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया)

छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पथ का प्रवेश बिंदु सीतामढ़ी है। यह स्थल सीता माता के नाम से जुड़ा है। यहां स्थित गुफाएं भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की उपस्थिति की गवाही देती हैं। लोककथाओं के अनुसार, वनवास के दौरान राम, सीता और लक्ष्मण ने यहां कुछ समय बिताया था।

रामगढ़ (अंबिकापुर)

सरगुजा जिले में स्थित रामगढ़ पहाड़ी का ऐतिहासिक महत्व है। यहां की सीताबेंगरा गुफा अपनी विशेष वास्तुकला और धार्मिक महत्व के लिए जानी जाती है। कहते हैं कि यह वह स्थान है जहां भगवान राम ने वनवास के दौरान विश्राम किया था। इस गुफा का सीता माता के कक्ष के रूप में भी उल्लेख मिलता है।

शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा)

शिवरीनारायण वह स्थान है जहां भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर खाए थे। इस जगह को शबरी की भक्ति और राम के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यहाँ शबरी और नर-नारायण का प्राचीन मंदिर स्थित है, जो पौराणिक महत्व को समेटे हुए है।

तुरतुरिया (बलौदाबाजार)

तुरतुरिया, जिसे लव-कुश की जन्मस्थली कहा जाता है, महर्षि वाल्मीकि के आश्रम के लिए प्रसिद्ध है। यहां की तुरतुर आवाज करती जलधारा इस स्थान की पहचान है। वनवास के दौरान भगवान राम ने यहां कुछ समय बिताया था, और यह स्थान धार्मिक महत्व के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी प्रसिद्ध है।

चंदखुरी (रायपुर)

रायपुर जिले के चंदखुरी को भगवान राम का ननिहाल माना जाता है। यहां माता कौशल्या का प्राचीन मंदिर स्थित है, जो दुनिया में अपनी तरह का एकमात्र मंदिर है। चंदखुरी में भगवान राम की माता के जन्मस्थान के रूप में एक विशेष पहचान है। यह स्थान तालाबों और हरियाली से घिरा हुआ है, जिसे सौंदर्यीकरण के जरिए पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनाया जा रहा है।

राजिम (गरियाबंद)

राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है। यहां महानदी, पैरी और सोंढुर नदियों का संगम है। यह स्थल भगवान राम के कुलदेवता महादेव की पूजा से जुड़ा हुआ है। संगम तट पर स्थित कुलेश्वर महादेव का मंदिर इस स्थान की धार्मिकता को और भी बढ़ा देता है।

सिहावा-साऋषि आश्रम (धमतरी)

धमतरी जिले की सिहावा पहाड़ियां ऋषियों के आश्रमों के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां शरभंग, अगस्त्य, अंगिरा, श्रृंगि, कंकर, मुचकुंद और गौतम ऋषि के आश्रम स्थित हैं। भगवान राम ने दंडकारण्य में ऋषियों से भेंट की थी और यहां कुछ समय बिताया था।

जगदलपुर (बस्तर)

जगदलपुर में भगवान राम के वनवास की कई कहानियां प्रचलित हैं। यह स्थान बस्तर के हरे-भरे जंगलों के बीच स्थित है, जहां भगवान राम ने अपने वनवास के समय को बिताया था। पांडवों के अंतिम राजा काकतिया की राजधानी के रूप में भी जगदलपुर का ऐतिहासिक महत्व है।

रामाराम (सुकमा)

छत्तीसगढ़ के दक्षिणी सिरे पर स्थित रामाराम वह स्थान है, जहां भगवान राम ने वनवास के दौरान विश्राम किया था। यहां से राम वन गमन पथ आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ता है।

छत्तीसगढ़ सरकार की योजना है कि राम वन गमन पथ के अंतर्गत आने वाले सभी स्थानों का विकास किया जाए, जिससे राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को संजोया जा सके। पौधारोपण, सड़क निर्माण, मंदिरों का जीर्णोद्धार और पर्यटक सुविधाओं के विकास का कार्य जोरों पर है। सड़क के दोनों ओर खूबसूरत फूलों के पौधे लगाए जा रहे हैं, जिससे पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य का भी अनुभव हो।

Positive सार

यह पथ भगवान राम के वनवास काल की स्मृतियों को जीवित रखने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों को भी उजागर कर रहा है। राम वन गमन पथ न केवल भगवान राम की यात्रा को पुनः स्थापित कर रहा है, बल्कि इसे राज्य की पहचान के रूप में भी उभारने का कार्य भी कर रहा है।

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Rishita Diwan

Content Writer

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