Basant Panchami 2024: प्रकृति हमें क्या नहीं देती है, जीवन, सुंदरता, अहसास और प्रेरणा। प्रकृति की इसी उदारता का उत्सव होता है बसंत पंचमी। जिसमें हम देवी सरस्वती की पूजा करते हैं। कहते हैं कि बसंत पंचमी नई शुरूआत का प्रतीक होता है, नई प्रतिज्ञा, नई सोच और दृढ़ता की शुरूआत इस दिन की जाती है। Basant Panchami के दिन लोग अपने परिवार के साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं। शास्त्रों में Basant Panchami को शांति और प्रेम का प्रतीक कहा गया है।
बसंत पंचमी क्यों होता है खास?
यूं तो लोग बसंत पंचमी को कई अलग-अलग तरीकों से मनाते हैं, लेकिन इसे शिक्षा का त्यौहार भी कहा जाता है। ये दिन ज्ञान, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। हर साल माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। इस बार बसंत पंचमी 14 फरवरी को मनाई जा रही है। इस खास दिन लोग सुबह उठकर नहाते हैं, पीले वस्त्र पहनते हैं और मां सरस्वती की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से साधक को मां सरस्वती का आशीर्वाद मिलता है। इसके अलावा शिक्षा के क्षेत्र में जैसे- स्कूल, कॉलेज और विभिन्न इंस्टीट्यूशन्स में माता सरस्वती की पूजा की जाती है।
पूरे देश में बसंत पंचमी का उत्सव बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। क्या आप जानते हैं कि विविधता से भरी हमारी भारतीय संस्कृति में बसंत पंचमी को सेलीब्रेट करने के कई तरीके हैं, जानते हैं भारत के विभिन्न भागों में इसे कैसे मनाया जाता है।
उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बसंत पंचमी
उत्तर प्रदेश और राजस्थान राज्यों में बसंत पंचमी का त्यौहार काफी उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग सुबह-सुबह ही स्नान कर पीले वस्त्र पहनते हैं। मां सरस्वती की विशेष आराधना होती है। उन्हें पीली चीजें जैसे पीले फूल, पीले मीठे चावल का भोग, पीले वस्त्र चढ़ाया जाता है। कुछ लोग हवन भी करवाते हैं। बच्चे शिक्षण सामग्री जैसे कॉपी-किताबों की पूजा करते हैं। इन क्षेत्रों में संगीत प्रेमी अपने वाद्य यंत्रों की पूजा करवाते हैं। पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है और पतंगबाजी करते हैं।
पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल में Basant Panchami का उत्सव काफी खास होता है। इस दिन यहां पर लोग हाथेखोड़ी मनाते हैं, हाथेखोड़ी में पहली बार बच्चों को पेन पेंसिल पकड़ाकर लिखना सिखाया जाता है। ये उत्सव काफी धूमधाम से मनाया जाता है। इसके लिए बंगाली काफी पहले ही तैयारी करते हैं। पंडाल लगाते हैं मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करते हैं। जहां बड़ी संख्या में लोग उपस्थित होते हैं। माता सरस्वती को पलाश के फूल, पीले चावल और बूंदी के लड्डू चढ़ाये जाते हैं।
बिहार
बिहार में Basant Panchami का अलग ही रंग देखने को मिलता है। इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनकर माता सरस्वती को मालपुआ और सादी बेसन की पकौड़ी चढ़ाते हैं। कई घरों में खिचड़ी भी बनाई जाती है। स्कूल कॉलेज में पूजा के बाद छुट्टी दे दी जाती है।
उत्तराखंड
उत्तराखंड में Basant Panchami के दिन स्थानीय लोग नृत्य करते हैं, पलाश के फूल माता सरस्वती को चढ़ाते हैं और केसर का हलवा बांटते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पहाड़ी लोग माता सरस्वती की पूजा के साथ मां पार्वती की भी पूजा करते हैं। पीले वस्त्र का महत्व यहां पर भी है।
पंजाब और हरियाणा
पंजाब और हरियाणा Basant Panchami में स्थानीय पकवान बनाए जाते हैं, जैसे मक्के की रोटी, सरसों का साग और खिचड़ी यहां लोग सुबह देवी की पूजा तो करते हैं साथ ही गुरूद्वारा भी जाते हैं। Basant Panchami के दिन पंजाबी और हरियाणवी लोग पतंगबाजी करते हैं और लोक गीत गाकर नृत्य करते हैं।
Positive सार
भले ही राज्य अलग हो सकते हैं, बोली-भाषा अलग हो सकती है संस्कृति अलग हो सकती है लेकिन भाव सभी के एक हैं। यही परंपरा भारतीय संस्कृति को खूबसूरत बनाती है। Basant Panchami का त्यौहार सभी के लिए नई खुशियां और नई शुरूआत लेकर आता है। भले ही इसे मनाने का तरीका अलग ही क्यों न हो। सभी को seepositive परिवार की तरफ से Basant Panchami की शुभकामनाएं।


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