RAM Mandir: किस वजह से भगवान राम की मूर्ति है श्याम रंग, कृष्ण शिला की क्या है भूमिका?

RAM Mandir: भगवान श्री राम अपनी जन्मभूमि अयोध्या में विराज चुके हैं। जैसे किसी राजा का भव्य राज्यभिषेक होता है, प्रजा और अनुयायी सिर झुकाए खड़ी होती है और सभी लोग गूंजायमान होते हैं वैसे ही वातावरण में भगवान राम अयोध्या में विराजे हैं। नागर शैली में बना भगवान राम का ये मंदिर कई मायनों में खास है। 1000 सालों तक अपनी यशगान से लोगों को प्रफुल्लित करता ये मंदिर इतिहास में अमर रहेगा। यहां के मंडप, गर्भगृह और भगवान राम की मूर्ति सबकुछ खास है। भगवान राम की मूर्ति को देखकर तो ऐसा लगता है जैसे अपनी चिर मुद्रा से सबकुछ कह रहे हों। उनकी मूर्ति में सजीवता डाली है प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज ने पर क्या आप ये जानते हैं कि अरुण योगीराज ने भगवान राम की मूर्ति श्याम रंग में कैसे बनाई और इसकी क्या खासियत है……

कृष्ण शिला से हुआ है भगवान राम की मूर्ति का निर्माण  

Ram Mandir Ayodhya मंदिर में भगवान राम की मूर्ति के निर्माण के लिए ‘कृष्ण शिला’ का इस्तेमाल किया गया है। ‘कृष्ण शिला’ पत्थर का यह रंग भगवान राम के श्याम रंग के सबसे करीब माना जाता है। इस ब्लैक ग्रेनाइट को प्रतिमा बनाने से पहले लैब में टेस्ट किया गया। बेंगलुरु के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रॉक मैकेनिक्स (NIRM) ने इस ब्लैक ग्रेनाइट का लैब टेस्ट करके प्रतिमा बनाने की अनुमति की। 

कृष्ण शिला की खासियत

कृष्ण शिला के नाम की यह ग्रेनाइट 2.5 अरब साल प्राचीन है। यह चट्टान काफी टिकाऊ और क्लाइमेट चेंज के अनुकूल है। यही वजह है कि इस ग्रेनाइट की चमक हजारों सालों तक ऐसी ही रहेगी, जैसी की अभी है। NIRM एक भारतीय संस्थान है जो डैम और न्यूक्लियर पॉवर प्लांट के लिए रॉक और चट्टानों का टेस्ट करती है। 

इसके अलावा जब भगवान श्री राम का दूध से अभिषेक होगा तो दूध के गुण में पत्थर की वजह से किसी तरह का कोई  बदलाव नहीं होगा। दूध से अभिषेक कराने के बाद अगर उस दूध का दोबारा इस्तेमाल किया जाता है तो इसका हेल्थ पर भी कोई गलत असर नहीं पड़ेगा। साथ ही ये हजार से भी अधिक सालों तक अपने वर्तमान अवस्था में ही रहेगा इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।

इस ‘कृष्ण शिला’ को कर्नाटक के मैसूर जिले के जयापुरा होबली गांव से लाया गया है। यहां की खदानों में ‘कृष्ण शिला’  ग्रेनाइट मिलता है। कर्नाटक के इस खदान को प्री-कैम्ब्रियन इरा का माना गया है। जिसकी उम्र अरब साल है। आंकड़ों की मानें तो पृथ्वी 4.5 अरब साल पहले बनी थी और इस हिसाब से ‘कृष्ण शिला’ चट्टान की उम्र धरती से आधी है। 

‘कृष्ण शिला’ बारीक दानेदार, कठोर और डेंस होता है। इसमें हाई टेंपरेचर सहने की शक्ति होती है। खदान से निकलने के समय ये नरम होता है, लेकिन 2-3 साल में कठोर हो जाता है। ‘कृष्ण शिला’ पत्थर पानी को सोखता नहीं और साथ ही कार्बन के साथ कोई रिएक्शन भी नहीं करता है। 

वाल्मिकी रामायण में जिक्र 

वाल्‍मीकि रामायण में भगवान श्री राम के स्वरूप को श्याम वर्ण में ही बताया गया है। जिसकी वजह से भी भगवान राम की मूर्ति का रंग श्यामल रखा गया है। इसमें ये भी कहा गया है कि भगवान राम का श्यामल रूप में ही पूजन किया जाता है। 

भगवान श्री राम की प्रतिमा को देखकर ही ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये कितनी जीवंत है, श्रद्धा स्वरूप भगवान राम वैसे भी लोगों के दिलों में जीवंत तो है ही लेकिन उनकी प्रतिमा को देखकर इसकी अनुभूति पूरी तरह से हो जाती है।

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Rishita Diwan

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