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स्वास्थ्य

MEDICINE: वैज्ञानिकों ने खोजी ‘सुपरड्रग’, हर साल बचेगी 70 लाख लोगों की जान!

by Rishita Diwan

Read Time: 1 minute



अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक ऐसी दवाई खोज निकाली है, जो सुपरबग्स के खिलाफ काफी काम आ सकती है। फैबिमायसिन नाम का यह ड्रक रिसर्च के दौरान यह सैकड़ों बैक्टीरिया मारने में सक्षम पाया गया। यह सभी बैक्टीरिया सामान्य मेडिसीन के प्रति रेसिस्टेंट हैं।

ज्यादा दवाओं से बनते हैं सुपरबग्स

सुपरबग उस तरह का बैक्टीरिया, वायरस, पैरासाइट या फंगस है, जिस पर एंटीबायोटिक दवाओं का कोई भी असर नहीं होता। एक जीवाणु के सुपरबग बनने की मुख्य वजह ज्यादा मात्रा में एंटीबायोटिक दवाओं का यूज है। नॉर्मल बैक्टीरिया का क्रोमोजोम एंटीबायोटिक दवा के प्रोटीन मॉलिक्यूल्स का तोड़ निकालने लगता है और उनके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करता है।

डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, सुपरबग के इन्फेक्शन से हर साल 70 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इसके प्रति सावधान होना काफी जरूरी है।

300 से ज्यादा सुपरबग्स पर कारगर है फैबिमायसिन

फैबिमायसिन एक मैन-मेड ड्रग है, जिसका ट्रायल सबसे पहले चूहों पर हुआ था। वैज्ञानिकों ने इसके रिसर्च में पाया कि इसने चूहों में ड्रग-रेसिस्टेंट निमोनिया और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन्स (UTIs) को ठीक करने का काम किया। इस पर और रिसर्च के बाद यह पता चला कि यह ड्रग सुपरबग्स की 300 से ज्यादा स्ट्रेन्स को मारने में सक्षम है।

14 वर्जन्स हुए हैं तैयार

यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस के वैज्ञानिकों ने फैबिमायसिन के 14 वर्जन्स तैयार किए हैं। ये स्किन इन्फेक्शन, ब्लड पॉइजनिंग और टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम जैसी स्थितियों को पैदा करने वाले सुपरबग्स को खत्म करते हैं।
दवाओं के इन वर्जन्स को चूहों में 10 अलग-अलग बैक्टीरिया पर ट्राइ किया गया। इसमें ई कोली नाम का बैक्टीरिया भी शामिल था, जो UTI का कारण है। इसके अलावा के. निमोनिया बैक्टीरिया पर भी फैबिमायसिन की जांच की गई, जो फेफड़ों में संक्रमण और निमोनिया की वजह से होता है।

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