Capital of India: कैसे दिल्ली बनी भारत की राजधानी, जानें जरूरी किस्सा!

Capital of India: भारत की राजधानी कहां है इस सवाल का जवाब दिल्ली तो सभी जानते हैं। पर क्या आप ये जानते हैं कैसे दिल्ली भारत की राजधानी बनी। और दिल्ली से पहले भारत की राजधानी कहां थी। इन तमाम सवालों के जवाब इस आर्टिकल के जरिए हम आपको देने जा रहे हैं।

भारत की राजधानी ‘दिल्ली’

12 दिसंबर 1911 को ये तय किया गया कि भारत की राजधानी दिल्ली को बनाया जाएगा। इसके बाद 13 फरवरी 1931 को दिल्ली को भारत की ऑफिशियल राजधानी घोषित कर दी गई। आपको बता दें कि दिल्ली से पहले भारत की राजधानी कलकत्ता हुआ करती थी। लेकिन ऐसी कौन सी वजह थी कि दिल्ली को राजधानी घोषित की गई।

इतिहास में दर्ज है ये कहानी

भारत की राजधानी (Capital of India) कलकत्ता से दिल्ली शिफ्ट करने की नींव पहली बार तब पड़ी जब साल 1905 में बंगाल का बंटवारा हुआ। जैसे ही बंगाल का बंटवारा हुआ। देश भर में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोहों की शुरुआत हुई। इससे बचने के लिए दिल्ली को राजधानी बनाने की कवायद शुरू हुई। लेकिन सिर्फ ये ही एक वजह नहीं थी दरअसल अंग्रेजों में दिल्ली के प्रति शुरू से ही खास लगाव था। अंग्रेज चाहते थे कि वो दिल्ली पर अपनी छाप छोड़ें। यही वजह रही कि उन्होंने वायसराय हाउस और नेशनल वॉर जैसी इमारतें दिल्ली में बनवाई जो अब राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट के नाम से जाना जाता है।

जार्च पंचम ने दिया आदेश

ब्रिटिश शासक ये सोचते थे कि भारत में शासन करने के लिए कलकत्ता की जगह दिल्ली को राजधानी बनाया जाए। बंगाल में विभाजन के बाद अंग्रेजों के खिलाफ शुरू हुए विद्रोह ने उन्हें दिल्ली को राजधानी बनाने पर मजबूर किया। इसके लिए इंग्लैंड के महाराजा जॉर्ज पंचम ने देश की राजधानी को दिल्ली ले जाने का आदेश दिया।

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हजारों लोगों के सामने हुई घोषणा

दिल्ली के भारत की राजधानी (Capital of India) बनने की घोषणा ब्रिटेन के राजा किंग जॉर्ज-5 और क्वीन मैरी ने की। उन्होंने 12 दिसम्बर 1911 को इसकी घोषणा की। सुबह-सुबह 80 हजार लोगों की भीड़ के सामने ये बात जनता के सामने रखी गई।

भारत की राजधान ‘दिल्ली’ भारत की राजधानी (Capital of India) दिल्ली आज एक महानगर है। देश के उत्तर में स्थित ये शहर काफी ऐतिहासिक भी है। यहां के भव्य लाल किला, भारत का प्रतीक, और विशाल जामा मस्जिद मस्जिद मौजूद है। इसके अलावा कई ऐसी जगहें हैं जो भारत के पारंपरिक और सांस्कृतिक विरासत की कहानी कहते हैं।

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Rishita Diwan

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