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हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में डेवलप हो रहा बायोसेंसर डेटा, कम होंगे सुसाइड के मामले, जानें कैसे करेगा काम!

by Rishita Diwan

Date & Time: Nov 17, 2022 8:00 AM

Read Time: 2 minute



RESEARCH: हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का मनोविज्ञान विभाग एक ऐसे बायोसेंसर डेटा पर काम कर रही है जिसकी मदद से सुसाइड की प्रवृति को पहचाना जा सकेगा। मनोवैज्ञानिकों के पास आए कुछ लोगों पर उन्होंने इस तकनीक का प्रयोग किया है।

बायोसेंसर डेटा से पता की जाएगी सुसाइड की प्रवृत्ति

रिसर्चर्स बायोसेंसर डेटा के जरिए यह पता लगाएंगे कि किसी व्यक्ति के दिमाग में सुसाइड करने का विचार कब और किस स्थिति में आता है। इसके लिए उन्होंने चुनिंदा लोगों के स्मार्ट फोन में कुछ एप्स इंस्टाल किए हैं। साथ ही जिन लोगों पर प्रयोग हो रहा है उनके हाथ पर डिजिटल बैंड भी बांधा गया है। इससे मनोवैज्ञानिक उन लोगों की दिनभर की गतिविधियों का डाटा एकत्रित कर सकेंगे।

GPS के माध्यम से ट्रैक हो रही है लोगों की गतिविधियां

प्रयोग में शामिल एक 20 वर्षीय युवती कुछ दिन पहले ही मनोवैज्ञानिक से अपना इलाज करवा कर घर लौटी थी। और अब उसे मनोवैज्ञानिक जीपीएस के माध्यम से ट्रैक कर रहे हैं कि वह घर से बाहर निकलती हैं या नहीं। अगर निकलती हैं तो कितनी देर तर बाहर समय बिताती है। उसकी पल्स रेट कितनी रहती है। किस समय ये बढ़ती या फिर घट जाती है। डिजिटल बैंड के जरिए उस युवती की नींद पर भी नजर रखी जा रही है। सोते समय कितनी बार उनकी नींद टूटती है इस बात का भी वैज्ञानिक ध्यान रख रहे हैं।

GPS और डिजिटल बैंड की खासियत

रिसर्च से जुड़े एक मनोवैज्ञानिक रिसर्चर का कहना है कि इन सारी चीजों की जांच-परख करेंगे। इससे हमें यह पता लगाने में मदद होगी कि सामने वाला व्यक्ति सुसाइड के बारे में सोच रहा है। इस तकनीक के माध्यम से उस व्यक्ति की जान बचाई जा सकेगी। उनके मुताबिक अगर किसी की नींद बार-बार टूटती है तो इसका मतलब ये है कि उसका मूड सही नही है।

यदि GPS से ये पता चलता है कि वह बार-बार घर के अंदर घूम रहा है, इसका मतलब ये है कि उसे गुस्सा आ रहा है। इस तरह से सेंसर रिपोर्ट तैयार होती है, जो बताती है कि व्यक्ति परेशान है या नहीं। इससे सुसाइड के मामलों को कम किया जा सकेगा।

रिसर्चर्स समय-समय पर रोगियों का फीडबैक भी ले रहे हैं। सवालों के माध्यम से यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि उन मनोरोगियों को कैसा महसूस हो रहा है। उन्हें कौन सी चीजें ठीक और कौन सी बातें गलत लगती हैं। बता दें विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनिया में हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति सुसाइड को अंजाम देता है।

Also Read: All You Need to Know about India’s home grown alternative to the GPS navigation system

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