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सेकंड हैंड होगा सेफ हैंड ,आसानी से पता चलेगी कि गाड़ी चोरी की तो नहीं!

by admin

Date & Time: Nov 01, 2021 10:00 AM

Read Time: 4 minute



पनी गाड़ी ' ये दो शब्द नहीं बल्कि न जाने कितने लोगो के सपने है। एक छोटा बच्चा भी खिलौने वाली गाड़ी पाकर खुश हो जाता है। Upper class  हो या middle class या फिर lower middle class हर कोई गाड़ी खरीदने के सपने देखता है । लेकिन इस सपने को पूरा करने से पहले वह एक बार अपनी जेब ज़रूर टटोलता है। जरा सोचिए अगर गाड़ी खरीदने का यह सपना कम कीमत में पूरा हो जाए तो कितना अच्छा होगा। और सैकेंड हैंड व्हीकल हमारे गाड़ी खरीदने के इस सपने को पूरा करने के नए रास्ते खोल देती है।

त्योहर कार और परिवार
दीवाली भारत का एक बड़ा त्यौहार है। इस समय भारत का हर व्यक्ति खरीददारी करता है। फिर चाहे वह खरीददारी बड़ी हो या छोटी। दीवाली में धनतेरस एक ऐसा दिन होता है जिसकी तैयारी कई महीने पहले शुरू हो जाती है। कोई-कोई तो इसके लिए सालों से पैसे जमा कर रहा होता है। ऐसे में धनतेरस का दिन सबसे खास होता है। इस बार की दिवाली Automobile sector के लिए कुछ खास है। जिसकी वजह से  'सेकंड हैंड व्हीकल' की खरीद-बिक्री में भी चार चाँद लग गए है । अगर आप दिवाली में सैकेंड हैंड व्हीकल खरीदने जा रहे हैं तो देखिए कैसे आप अपने कार के सपने को पूरा कर सकते हैं।

बगैर 'NOC' के न खरीदें कार
सैकेंड हैंड गाड़ी खरीदी तो जा सकती है लेकिन इस सुनहरे अवसर का फ़ायदा गाड़ी खरीदने वाले के साथ-साथ चोरी के वाहन बेचने वाले लोग भी उठा रहे है। ग्रामीण और main stream से दूर रह रहे लोग इस बात से अनजान होते हैं और ठगे जाते है। लेकिन कहते है न की जहाँ समस्या होती है वही उसका समाधान भी मौजूद होता है। अब आपके अपने क्षेत्र में ही पता चल जायेगा कि कोई भी गाड़ी उसका मालिक बेच रहा है या फिर कोई चोर। इसके लिए नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC ) के बीच agreement sign हुआ है।

इसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को सेकंड हैंड वाहन खरीदने में कोई समस्या नहीं आए , केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (IT Ministry ) के तहत काम कर रहे कॉमन सर्विस सेंटर ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB ), इसके तहत देश भर के कॉमन सर्विस सेंटरों के करीब चार लाख स्थानों पर USED VEHICLE के खरीदारों को उस वाहन के संबंध में सारी जानकारी दी जाएगी।
कहते है कि आधा ज्ञान हमेशा हानिकारक होता है। और अधूरी जानकारी के साथ अगर आप कोई सेकंड हैंड व्हीकल खरीदते है तो आपके ठगे जाने की सम्भावना बढ़ जाती है। इस FESTIVAL या कभी भी आप सेकंड हैंड व्हीकल खरीदने की सोचते है तो आपको इस आर्टिकल से खरीदने के PROCESS से RELATED सारी जानकारी मिल जाएगी।
 
NCRB नहीं CSC देगी नोटिस
RULE तो यही है की सेकंड हैंड व्हीकल खरीदने के लिए NCRB से NOC लिया जाये। लेकिन भारत के कई ग्रामीण क्षेत्रों और कस्बो में ऐसा नहीं होता है इसकी एक वजह NCRB के दफ्तर का न होना है। लेकिन यहीं अगर कॉमन सर्विस सेंटर की बात की जाये तो गांवो के कोने-कोने तक CSC मिल जाती है। यही कारण है की NCRB और CSC के बीच में एक Agreement Sign हुआ है कि NCRB के बजाय अब CSC देगा NOC ।

 LOCKDOWN में भी बढ़ा सेकंड हैंड व्हीकल का बाजार
कॉमन सर्विस सेंटर के प्रबंध निदेशक दिनेश त्यागी का कहना है कि भारत में पुरानी गाड़ियों का बाजार बढ़ रहा है। इसका असर न सिर्फ शहरी समुदायों यहां तक कि कस्बों में भी पड़ा है। लोग बड़ी संख्या में निजी और व्यावसायिक वाहन खरीद रहे हैं। ऐसे में कॉमन सर्विस सेंटर पुराने वाहनों को तेज गति से खरीदने पर लोगों को NOC दे सकता है, खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को इसका अच्छा खासा फायदा मिलेगा। NOC यह भी बताएगा कि वाहन को बेचने से पहले किसी पुलिस रिकॉर्ड में कोई नोटिस है या नहीं।सेकंड हैंड व्हीकल के बाजार में उफान शायद CORONAVIRUS की वजह से आया होगा। लोग वायरस से बचाव के लिए public transport को avoid करने लगे है और खुद की गाड़ी खरीदने पर ज़ोर दे रहे है । यही वजह है कि सेकंड हैंड व्हीकल बजट में रह के पब्लिक ट्रांसपोर्ट से होने वाले नुकसान को रोकता है ।

पुरानी गाड़ियों को खरीदने के वक़्त आपके पास परिवहन विभाग से उसे अपने नाम कराना पड़ता है। और उस वक़्त रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस या आरटीओ गाड़ी के ट्रांसफर पेपर बनाने से पहले नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC ) प्राप्त करता है। और इस NOC से यह पता लगाया जाता है की वह गाड़ी किसी कानूनी मुकदमा या अन्य मामले से जुडी तो नहीं है।

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