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National Education Policy 2020: PHD में रिसर्च पेपर पब्लिश कराना जरूरी नहीं, दो संस्थानों से मिलकर भी पूरी होगी डिग्री!

by Rishita Diwan

Date & Time: Sep 02, 2022 4:00 PM

Read Time: 2 minute




PHD के अगले सेशन में एडमिशन लेने वाले छात्रों को नए नियमों के तहत छूट दी जाएगी। दरअसल पुराने नियमों के मुताबिक अब तक थीसिस किसी भी जर्नल में छपवाना जरूरी होता था। लेकिन अगले सेशन से एडमिशन लेने वाले छात्रों को नए नियम के तहत छूट दी जा रही है। इसके साथ ही छात्रों को अपनी रिसर्च का पेटेंट करवाने की सुविधा भी दी जाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत यूजीसी ने चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम को लागू करने की मंजूरी दे दी है। इसी के तहत अब चार वर्षीय ग्रेजुएशन डिग्री प्रोग्राम में 7.5 CGPA लेने वाले छात्र सीधे पीएचडी में एडमिशन पा सकेंगे।

नए सत्र से विश्वविद्यालयों, सीएसआईआर, आईसीएमआर, आईसीएआर आदि में इन्हीं नियमों के तहत PHD एडमिशन होंगे। इसके लिए 70 अंकों का रिटन और 30 का इंटरव्यू पास करना होगा। पीएचडी प्रोग्राम में कम से कम 12 और अधिक से अधिक16 क्रेडिट होना अनिवार्य है।

पीएचडी में एडमिशन

तीन साल ग्रेजुएशन और दो साल का पीजी करने वाले छात्रों को दी जाएगी एडमिशन।

पीजी प्रोग्राम में 50 या 55 % अंक लाना अनिवार्य।

चार वर्षीय ग्रेजुएशन और एक साल का पीजी प्रोग्राम की पढ़ाई करने वाले छात्र एडमिशन पाने के हकदार होंगे। इसके लिए पीजी प्रोग्राम में 50 या 55 फीसदी अंक लाना अनिवार्य होगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम के रिसर्च या ऑनर्स प्रोग्राम के छात्र सीधे PHD में एडमिशन ले सकेंगे। लेकिन PHD के लिए विश्वविद्यालयों की संयुक्त दाखिला प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए CGPA 7.5 से अधिक होना जरूरी होगा।

विश्वविद्यालयों की कुल PHD सीटों में से 60 फीसदी सीट नेट या जेआरएफ क्वालीफाई छात्रों के लिए आरक्षित है।

जबकि विश्वविद्यालय अपनी 40 फीसदी सीटों पर या एनटीए द्वारा आयोजित होने वाली संयुक्त दाखिला प्रवेश परीक्षा की मेरिट से एडमिशन दे पाएंगे।

पीएचडी के लिए समय

PHD छह साल में पूरी करनी होगी। कोई भी संस्थान दो साल से ज्यादा का समय नहीं देगा। वहीं, महिला उम्मीदवारों और दिव्यांगजनों (40 फीसदी से अधिक) को छह साल के अलावा दो साल ज्यादा समय मिलेगा। महिला उम्मीदवारों को पीएचडी कार्यकाल में मैटरनिटी लीव, चाइल्ड केयर लीव के तहत 240 दिनों का अवकाश भी मिल सकता है। PHD वाइवा ऑनलाइन होगा। इसका उद्देश्य छात्र और विश्वविद्यालय के समय की और आर्थिक बचत करना है। इसमें पहले ऑनलाइन वाइवा देना है ,अगर छात्र को किसी प्रकार की परेशानी हो रही हो तो वह वाइवा ऑफलाइन दे सकते हैं।

दो संस्थान मिलकर पूरा करवा सकते हैं पीएचडी

नए नियमों में दो कॉलेज मिलकर अब डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई पूरी करवा सकते हैं। इसके लिए दोनों संस्थानों को आपस में समझौता करना होगा। इसमें कमेटी तय करेगी कि रिसर्च एरिया और सुपरवाइजर (गाइड) और को-सुपरवाइजर (दो गाइड) मिलकर कैसे PHD पूरा करवाएंगे। इसमें कोई भी सुपरवाइजर तय नियमों के तहत ही पीएचडी स्कॉलर्स रख सकता है।

Also Read: Students can now pursue PhD after 4-year undergraduate course

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