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बस यूँ ही

by Dr Kirti Sisodia

Read Time: 1 minute

विवार की शाम आम दिनों से थोड़ी अलग होती ही हैं I लेकिन आज की शाम और भी अलग थी , तपती गरमी में जब मानसून अपने आने की आहट सुनाने लगे तो मानो प्रक्रति ने मधुर संगीत के तार छेड़ दिये हो I अपने घर के बग़ीचे में चाय की चुस्कियाँ लेते हम आज शाम ऐसे ही मौसम का लुफ्त उठा रहे थेI

मंद- मंद ठंडी  हवाओं के झोंके, जैसे कुछ कहते हुये कानों के नज़दीक से गुज़र रहे थेI असीम सा  ठहराव पूरे वातावरण में एक सुखद अनुभूति दे रहा था I धीरे – धीरे हवाओं का वेग बढ़ने लगा, बढ़ते- बढ़ते उन मंद झोंको ने विकराल रूप ले लिया, अचानक पूरा मंज़र ही बदल गया, जहाँ ठहराव था वहाँ डर और बेचैनी आ चुकी थीI तेज़ हवायें इतनी क्रोधित प्रतीत हो रही थी मानो सब कुछ अपने साथ उड़ा ले जायेगीI स्कूटर, साइकिल, गमले, बोर्ड गिर पड़ रहे थेI छोटे – छोटे पौधे अपनी जड़ों से उखड़ चुके थेI

तभी अचानक एक पेड़ की तरफ़ हमारा ध्यान गया, जो तेज़ हवाओं को पूरी ताक़त से जवाब दे रहा हो, तेज़ हवाओं के बावजूद भी उसने अपनी जड़ो को इतनी मजबूती और विश्वास से पकड़ा था कि तेज़ हवाओं में  वो झुक ज़रूर रहा था लेकिन टूटा नहींI अचानक फिर मौसम बदला और तेज़ हवायें धीमे होते हुये सामान्य हो गयीI और फिर वो पेड़ सीधे खड़ा मानो मुस्कुरा कर कह रहा हो मैं जीत गयाI ये मंज़र भले ही कुछ क्षणो का रहा लेकिन जीवन को एक सिरे से परिभाषित कर गयाI

जीवन में मुश्किलें, परेशानियाँ, बिखरना सब आता रहेगा, जरुरी हैं हम किस मानसिकता और विश्वास से उसका सामना करते हैं I परिस्थितियों के हिसाब से अपने आप को लचीला बनाना और अपनी जड़ों से जुड़े रहने से जो संबल हमें मिलता है वहाँ हर जीत संभव हैं I सकारात्मकता जीवन का एक मूलमंत्र है जो शायद जीवन के हर प्रश्न का हल हैं I बस यूँ ही आज प्रकृति ने दृढता, साहस और सकरात्मकता की सीख दी I

#seepositive

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