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BUSINESS

भारत कोरोना के बाद क्या अपनी ग्रोथ वापस हासिल कर पायेगा?

by admin

4 min Read


Lockdown ने न केवल भारत के लोगो पर बल्कि सभी बिज़नेस ओर उद्योग जगत पर भी lock लगा दिया था। लेकिन unlock की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही इस lock को खोलने की कवायद शुरू हो गयी है। ओर इसके साथ ही देश की economy को वापस पटरी पर लाने की कोशिशें भी तेज़ हो गयी हैं। देश को अब न सिर्फ जानलेवा वायरस से लड़ना है बल्कि गिरती अर्थव्यवस्था को भी संकट से उभारना है ओर फिर से अपनी ग्रोथ हासिल करना है। ऐसे में हाल ही में हुए CII की 125 वीं वर्षगांठ में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 5 I's का concept प्रस्तुत किया जिसके ज़रिये भारत फिर से अपनी ग्रोथ की रफ़्तार पकड़ सकेगा। या पांच I हैं Intent, Inclusion, Investment, Infrastructure ओर Innovation.

Privatization को दिया जा रहा है बढ़ावा

भारत हर क्षेत्र में Privatization पर ज़ोर दे रहा है; फिर चाहे वो Agriculture Sector हो या Defence एवं Manufacturing sector. Strategic sectors की बात की जाए तो सरकार धीरे-धीरे कई Public Sector Enterprises (PSEs) के निजीकरण के लिए व्यापक कदम उठा रही है। उदाहरण के तौर पर coal mining, जहाँ अब तक Coal India का एक छत्र राज हुआ करता था, उसे अब समाप्त कर दिया है। छोटे हवाई अड्डे, जिन्होंने तेजी से यात्री विकास देखा है, लेकिन Airports Authority of India (AAI) और इसकी बाधाओं के कारण इसका लाभ नहीं ले पाए हैं। अब इन्हें कुछ शर्तों के साथ निजी ऑपरेटरों के हवाले किया जा रहा है।

भारतीय रेलवे, एयर इंडिया के लिए 100% निजीकरण के प्रयास, और यहां तक ​​कि भारत पेट्रोलियम जैसी तेल और गैस कंपनियां, SAIL, Shipping Corp of India (SCI), THDC इंडिया और NEEPCO उन निजीकरण के फ़ैसलों में शामिल हैं जो पहले ही लिए जा चुके हैं।

इसी प्रकार MSMEs, जिन्हें भारत की अर्थव्यवस्था का इंजन भी माना जाता है, उन्हें भी आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार ने 200 करोड़ तक की सरकारी ख़रीद में ग्लोबल टेंडर को समाप्त कर दिया है जिससे मध्यम तथा लघु उद्योगों को इस क्षेत्र में नए अवसर प्रदान किये जा सकें। इसके अतिरिक्त सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम जिन्हें परिभाषित करने की मांग वर्षों से चली आ रही थी, उसे भी अब परिभाषित किया जा चुका है जिससे अब इस क्षेत्र की ग्रोथ में उछाल की संभावनाएं ओर अधिक बढ़ गयी हैं।

Non-Strategic Sectors का भी हो रहा निजीकरण

देश की व्यवस्थाओं में सरकार अपनी हस्तक्षेप को कम करने के प्रयास में जुटा हुआ है। इसी के तहत Non-Strategic Sectors के सभी Public Sector Undertakings (PSUs) को भी पूरी तरह से privatize करने का फैसला लिया जा चुका है। इससे न केवल इन क्षेत्रों में निजी कंपनियों के लिए नए रास्ते खुलेंगे बल्कि रोज़गार के अधिक अवसर भी पैदा होंगे। इसके पहले भी, चालू वित्त वर्ष में, कोरोनावाइरस महामारी होने के महीनों पहले, सरकार ने पहले ही PSUs के निजीकरण के माध्यम से 2.1 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश कर लिया था।

भारत में कृषि क्षेत्र को तकनीक के माध्यम किया जा रहा है विकसित

भारत की GDP में कृषि क्षेत्र का योगदान लगभग 16% है। इससे जुड़े 70 प्रतिशत ग्रामीण परिवार अभी भी मुख्य रूप से अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं। ऐसे में किसान और उसकी फसल को उचित फायदे मिले इसके लिए भी नियमों में तेज़ी से बदलाव किये जा रहे हैं। Agricultural Produce Marketing Committee (APMC) एक्ट में बदलाव के बाद अब किसान अपनी फसल को देश के किसी भी राज्य में बेच सकता है। इसके साथ ही warehouses में रखे अनाज या कृषि उत्पाद को इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग के ज़रिये भी बेचा जा सकता है। यह कदम भारत में कृषि से संबंधित रोज़गार के अवसरों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Made in India के साथ Made for the world हो भारतीय उत्पाद

Made in India के साथ Made for the world हो भारतीय उत्पाद

कोरोना के बाद भारत को लेकर विश्व के बहुत से देशों का विश्वास और उम्मीदें बढ़ीं है। वे अब भारत में व्यापार और निवेश की नयी संभावनाएं तलाश रहे हैं। इसकी वजह यह है की जब सारी दुनिया कोरोना की भयानक बीमारी में खुद को प्राथमिकता देते हुए संभलने का प्रयास कर रही थी, तब भारत ने 150 देशों को मेडिकल supplies देकर उनकी मदद की। भारत के पास विकास के लिए क्षमता, सामर्थ्य और शक्ति है। इसका सबसे बढ़िया उदाहरण हाल ही में हमें देखने को मिला। कोरोना महामारी की शुरुआत में भारत एक भी Personal Protective Equipment (PPE) का उत्पादन नहीं करता था। मगर केवल 3 महीनों के अंतराल में PPE kits का एक बहुत बड़ा उद्योग यहाँ खड़ा हो गया है। आज यहाँ हर दिन लगभग 3 लाख PPE kits का उत्पादन किया जाता है और इसका निर्यात भी किया जाने लगा है।

ऐसे में जब पूरे विश्व की नज़रे भारत पर हैं तब भारतीय उद्योग जगत को इस परिस्थिति का भरपूर फायदा उठाना चाहिए और ऐसे उत्पादों का निर्माण करना चाहिए जो Made in India होने के साथ ही भरोसेमंद, गुणवत्ता से भरपूर और competitive भी हों। भारतीय उत्पादों का Made in India होने के साथ ही Made for the world भी होना आवश्यक है।

अंत में...

कोरोना से भारत दो कदम पीछे ज़रूर हुआ है पर वो भावी अवसरों का लाभ उठाकर एक लम्बी और महत्वपूर्ण छलांग लगाने के प्रयास में जुटा हुआ है। जान के साथ जहान को बचाने के संकल्प के साथ अब हर क्षेत्र में रोज़गार के नए रास्ते खोले जा रहे हैं। आत्मनिर्भर भारत और Vocal for Local जैसे नारों के साथ घरेलू उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही तकनीक के ज़रिये व्यापार और कृषि के रूढ़िवादी तरीकों में भी बदलाव किये जा रहे है। इन सारे प्रयासों से यही उम्मीद है की भारत अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने में सफलता हासिल कर ही लेगा।


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