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EDUCATION

DIGITIZATION से शिक्षा पहुंचेगी अब हर गाँव तक 5G की रफ़्तार से।

by admin

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भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से ग्रामीण है, इसकी दो-तिहाई से अधिक आबादी गाँवों में रहती है। हमारी राष्ट्रीय आय में कुल 46% का योगदान ग्रामीण भारत देता है। 833 करोड़ लोगों की आबादी आज भी (जो ग्रामीण चीन से बड़ा है) 640,867 गाँवों में रहती है। यह अनुमान है कि 2050 तक, बढ़ते शहरी करण के बावजूद, भारत की आधी से अधिक आबादी तब भी ग्रामीण होगी। और इसीलिए गाँवों को Digitization से जोड़ना और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

आम सेवा केंद्रों से तेज़ी से हो रहा गाँवों का डिजिटलीकरण

Technology और Online प्रक्रियाएं आसान हो रही हैं, आम सेवा केंद्र वित्तीय सेवाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। Digital payment भी आज के दौर में एक बुनियादी ज़रूरत बन चुकी है - फिर चाहे mobile phone का रिचार्ज करना हो या DTH और बिजली बिल का भुगतान, आम सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण एक बटन के क्लिक पर top-up या बिल का भुगतान कर सकते हैं। इसके अलावा, ई-कॉमर्स के बारे में जागरूकता बढ़ने के साथ, ग्रामीण उपभोक्ता ऐसे ऑनलाइन शॉपिंग विकल्प तलाश रहे हैं जो वर्तमान में केवल उनके शहरी समकक्षों के लिए उपलब्ध है।

ग्रामीण आबादी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए केंद्रित e-commerce पोर्टल लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं। यह एक नई लहर की शुरुआत है जो पिरामिड के निचले हिस्से को सशक्त कर रही है। जहां एक ओर Demonetization ने डिजिटल भुगतान को तेजी से अपनाने का मार्ग प्रशस्त किया, वहीं दूसरी ओर विभिन्न Start-ups Digital learning और Tele-medicine जैसी सुविधाओं के साथ ग्रामीण उपभोक्ता के दरवाजे पर दस्तक दे चुके हैं। यह ग्रामीण जागृति और ग्रामीण उद्यमिता के लिए भी नए अवसर पैदा कर रही है, जिसमें ग्रामीण युवा अपने भाइयों को डिजिटल सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, जिससे ऐसी सेवाओं को तेज़ी से अपनाया जा सके।

कोरोना के बाद गाँवों में तेज़ी से होगा online शिक्षण का विस्तार

कोरोना की इस महामारी ने जहाँ एक ओर पूरी दुनिया को परेशान किया हुआ है वहीं दूसरी ओर lock down की वजह से बच्चों की शिक्षा पर भी गहरा असर पड़ा है । शहर के स्कूल एवं दूसरे शिक्षण संस्थानों ने तो online teaching के माध्यम से बच्चों को पढ़ाना जारी रखा है लेकिन सबसे ज़्यादा परेशानी गाँव में बसे स्कूलों को उठानी पड़ रही है। Online education के लिए ज़रूरी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण शिक्षा पर अनिश्चितकाल के लिए विराम लग गया है।

भारतीय शिक्षा प्रणाली, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र, बहुत सी ढाँचागत चुनौतियों जैसे पर्याप्त infrastructure की कमी, शिक्षकों का अभाव, शिक्षण के पुराने और रूढ़िवादी तरीके इत्यादि से जूझ रही है। इस वजह से गाँवों में drop-out रेट भी अधिक है। पर Digital India जैसे प्रोत्साहन के कार्यो से इन स्थितियों में तेज़ी से बदलाव आ रहा है। इंटरनेट की पैठ में उल्लेखनीय वृद्धि और भारत में स्मार्टफोन की कीमतों में गिरावट के साथ, ऑनलाइन शिक्षण संसाधनों तक लोगों की पहुंच भी सर्वव्यापी हो रही है।

Technopak और Simpleilearn द्वारा भारत में डिजिटल लर्निंग मार्केट पर एक संयुक्त श्वेतपत्र के अनुसार, भारत में ऑनलाइन व्यावसायिक शिक्षा बाजार 30% CAGR तक बढ़ने की उम्मीद है, जो कि 2020 तक मौजूदा US $2 बिलियन से बढ़कर US $5.7 बिलियन तक पहुंच जाएगा। यह उन आईटी नौकरियों की बढ़ती संख्या के लिए आधार तैयार कर रहा है जो अगले कुछ दशकों में खुलेंगे, उन क्षेत्रों में जिनकी हम आज कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। डिजिटल लर्निंग निश्चित रूप से भारत में शिक्षा के लिए एक गेम-चेंजर बनकर उभरेगा।

गाँवों में digitization की आख़िर क्यों है ज़रूरत?

अधिकांश भारतीय ग्रामीण स्कूलों में शिक्षण पद्धति आज रट्टा सीखने से संबंधित है। आज के हाइपर-प्रतिस्पर्धी माहौल में, बिना समझे रट्टा सीखना छात्रों को ज़्यादा दूर तक नहीं ले जा पायेगा। यदि हम शिक्षा का digitization करते हैं, तो कई तरीकों से हम वर्तमान शिक्षा प्रणाली में क्रांति ला सकते हैं, जिससे शिक्षा और अधिक प्रभावी हो जाएगी। इनमें से कुछ तरीके उदाहरण के तौर पर नीचे दिए गए हैं।

  • Digital शिक्षण परंपरागत शिक्षण से ज़्यादा आकर्षक है।: विभिन्न प्रकार के tools जैसे ऑनलाइन assignmeents या वीडियो lectures का इस्तेमाल सीखने की प्रक्रिया को और ज़्यादा मज़ेदार और आकर्षक बना देते है। इसके साथ ही शिक्षकों के लिए भी मूल्यांकन की प्रक्रिया, record keeping और lesson planning जैसे कार्य भी automation की वजह से आसान हो जाते हैं।
  • Online learning समावेशी है।: Digitization दुनिया को करीब लाता है; यहाँ तक की क्लास रूम में भी। इससे शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों के बीच सहभागिता और सहयोग सहज हो जाता है, क्योंकि सभी शिक्षण सामग्री और मूल्यांकन को एक खुले मंच पर लाया जा सकता है। ना केवल यह बच्चों की योग्यता को बढ़ावा देता है, बल्कि यह छात्रों को अधिक प्रेरित और व्यस्त भी रखता है।
  • Online शिक्षण कक्षा की शिक्षा से परे है।: डिजिटल शिक्षा ना केवल कक्षा, बल्कि स्कूलों की सीमाओं के आगे तक भी पहुँचती है। जैसे-जैसे शिक्षा अधिक interactive हो जाती है, छात्र पढ़ाई में रोमांचक संभावनाओं की खोज करने और अपने संस्थान से परे अन्य शिक्षकों के साथ सहयोग करने के लिए स्वतंत्र होते हैं। दूसरी ओर, शिक्षक, देश में योग्य शिक्षकों की कमी की चिंता को दूर करते हुए ऑनलाइन ही देश और दुनिया के किसी भी कोने में ज्ञान प्रदान कर सकते हैं।

हर गाँव का योजनाबद्ध तरीके से हो रहा डिजिटलीकरण

Digitization से ग्रामीण भारत की कुछ प्रमुख जरूरतें पूरी हो सकती हैं जिनमें ई-गवर्नेंस सेवाएं, बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं, शैक्षिक और स्वास्थ्य सेवाएं, मोबाइल / डीटीएच रिचार्ज, ई-टिकटिंग सेवाएं ,ऑनलाइन शॉपिंग, आदि शामिल हैं। । 10 साल पहले, सरकार ने अपने प्रमुख National e-Governance Plan के अंतर्गत, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से विभिन्न सरकारी सेवाओं को उपलब्ध कराने और एक्सेस प्वाइंट बनाने के लिए ग्रामीण नागरिकों को सशक्त बनाने की परिकल्पना की थी।

ये केंद्र ग्रामीण नागरिकों को सरकारी और व्यावसायिक दोनों सेवाएं प्रदान करने वाले one-stop डिजिटल आउटलेट के रूप में कार्य करते हैं। ग्रामीण नागरिकों की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, इन केंद्रों पर उपलब्ध सेवाओं का धीरे-धीरे सरकारी सेवाओं से लेकर बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, मोबाइल टॉप-अप, बिजली भुगतान, रेलवे बुकिंग, ई-लर्निंग और ई-कॉमर्स तक विस्तार हो चुका है।

  • E-Kranti योजना

भारत में ग्रामीण शिक्षा के Digitization के लिए बुनियादी infrastructure को विकसित करने की आवश्यकता है। ई-क्रांति के तहत भारत सरकार इंटरनेट सेवाओं के लिए बुनियादी ढांचागत सुविधा प्रदान करके ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच digital विभाजन को पाटने की कोशिश कर रही है।

  • NGOs और निजी संस्थाओं के साथ डिजिटल बनेंगे गाँव

सरकार अब निजी क्षेत्रों के साथ-साथ गैर सरकारी संगठनों की भूमिका को प्रोत्साहित कर रही है ताकि भारतीय गांवों में डिजिटल शिक्षा उपकरण का प्रसार किया जा सके। कंपनियों की संसाधन क्षमता के उपयोग के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। ब्लैकबोर्ड से डिजिटल बोर्ड तक माइग्रेशन पर जोर दिया जा रहा है।

Vodafone foundation और Pratham Education Foundation के बीच साझेदारी में शुरू किया गया "Learn, Out of the Box" कार्यक्रम उन कुछ डिजिटल कार्यक्रमों में से एक है जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से वंचित छात्रों के लिए ई-लर्निंग का विस्तार करना है।

इसी प्रकार, जवाहर नवोदय विद्यालय ने सैमसंग के सहयोग से ना केवल कई छात्रों को digital learning की पहुँच प्रदान की है, बल्कि शिक्षकों को भी इंटरैक्टिव तकनीक का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया है।

जवाहर नवोदय विद्यालय और सरकार द्वारा संचालित अन्य स्कूल मुख्य रूप से ग्रामीण भारत के बच्चों के लिए डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षा की पहुँच बढ़ाने में अहम योगदान दे रहे हैं।

ई विद्यालोक (E-Vidyaloka) एक शैक्षिक सामाजिक उद्यम है, जिसे ग्रामीण भारत के बच्चों के लिए शिक्षा में गुणवत्ता को सक्षम करने की दृष्टि बनाया गया है। ई विद्यालोक (E-Vidyaloka) कार्यक्रम के द्वारा छात्रों को स्वयंसेवी शिक्षकों की मदद से ऑनलाइन बातचीत और अध्ययन करने का मौका मिलता है।

ई-विद्यालोक द्वारा एक वार्षिक कार्यक्रम "रूबरू", ग्रामीण-शहरी संपर्क को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जाता है। इस आयोजन का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में विचारशील नेताओं को ला कर चर्चा करना है कि कैसे शहरी समर्थन के माध्यम से ग्रामीण शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाया जा सकता है।

अपने फैलोशिप कार्यक्रम के माध्यम से, टीच फॉर इंडिया देश के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों के कुछ होनहारों को, कुछ सबसे कम-प्रतिष्ठित स्कूलों में निम्न-आय वाले समुदायों के बच्चों के लिए full-time शिक्षक के रूप में सेवा देने के लिए प्रोत्साहित करता है।

यह कार्यक्रम भारत की शिक्षा प्रणाली की वास्तविकताओं को समझने के लिए लोगो को तैयार करता है और शिक्षा प्रणाली में नेतृत्व के पदों को लेने के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल और मानसिकता को विकसित करने तथा शिक्षा में equity लाने का अवसर प्रदान करता है।

अंत में...

सरकार द्वारा digitization के लिए उठाये गए कदम और कोरोना महामारी के बीच डिजिटल होने की बढ़ती आवश्यकता की वजह से Digital learning का विस्तार गाँवों की ओर 5g की रफ़्तार से होगा क्योंकि digitization अब केवल लक्ज़री नहीं बल्कि एक बुनियादी ज़रूरत भी बन चुकी है। आगे चलकर कोरोना जैसी किसी भी मुसीबत के बावजूद शिक्षा का संचार गाँवों में भी उसी तरह से होते रहेगा जिस तरह आज के दौर में शहरों में देखा जा रहा है। भारत एक नए, Digital India की नींव रख चुका है।

 

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