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ONE NATION-ONE DATA: डिजीटल जानकारी की ओर भारत के बढ़ते कदम!

by Juhi Tripathi

Read Time: 4 minute


दुनिया की सबसे बड़ी विविधता, सबसे समृद्ध संस्कृति और भौगोलिक रूप से विश्व का सातवां बड़ा देश- हमारा भारत। लगभग 1 अरब से ज्यादा की आबादी और तेजी से विकास की ओर बढ़ते हमारे कदम वैश्विक पटल पर हमें ज्यादा एडवांस और तकनीकी रूप से समृद्ध कर रहे हैं। हमारी डिजिटल समृद्धता को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार One Nation-One Data रूप में एक नयी पहल की शरूआत करने जा रही है।

क्या है One Nation-One Data ?
हाल ही में केंद्र सरकार ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम (RBD ), 1969 में संशोधन के लिए प्रस्ताव रखा गया था। "राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत जन्म और मृत्यु के Database" को maintain करने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए यह प्रस्ताव लाया गया था , जिसकी संसोधन की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। और कैबिनेट के पास बिल जाने के लिए तैयार हो चूका है।नए कानून के बाद जन्म - मृत्यु पंजीयन का फॉर्मेट सभी राज्यों में एक हो जायेगा। राज्य स्तर पर इस डाटा को डिजिटल फॉर्म में लाने का कार्य भी किया जायेगा। सरकार इस डाटा के इस्तेमाल से बाकि डेटाबेस को अपडेट करेगी।

चर्चा में क्यों ?
हाल ही में केंद्र सरकार ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम (RBD ), 1969 में संशोधन के लिए प्रस्ताव रखा गया था। "राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत जन्म और मृत्यु के Database" को maintain करने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए यह प्रस्ताव लाया गया था , जिसकी संसोधन की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। जिसका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा। इसे हम कुछ चरणों में समझ सकते हैं-

भारत में जन्म और मृत्यु का registration -
भारत में किसी बच्चे का जन्म या किसी की मृत्यु होने पर उस व्यक्ति का पंजीकरण जरूरी होता है। इसके लिए भारत में जन्म और मृत्यु अधिनियम (RBD ), 1969 के Act मौजूद है। लेकिन आमतौर पर यह एक्ट काफी उलझा हुआ है। इन्हीं जटिलतओं को सरल बनाने के लिए इसमें संशोधन किया जा रहा है। ताकि आम नागरिकों में भी इस act के प्रावधानों की समझ विकसित हो।

One Nation-One Data की आवश्यक्ता
इससे न केवल राज्य को बल्कि केंद्र को भी 'जन्म-मृत्यु पंजीकरण database को बनाये रखने ' की शक्ति मिल जाएगी। इस डेटाबेस के उपयोग से जनसँख्या रजिस्टर और चुनाव रजिस्टर, आधारकार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट जैसी अन्य डेटाबेस को update करने में सरलता होगी। दरअसल मृत्यु के बाद भी कई कार्ड सक्रीय रहते है। जिससे सरकार और जनता के बीच misleading communication या उस डाटा का गलत इस्तेमाल होने के संभावना बढ़ जाती है। केंद्रीय स्तर पर updated data होने से मृतकों के data के पुरे base से हटाना संभव हो सकेगा।

इस संशोधन से होंगे 4 बड़े बदलाव!
1 . सरकार से संवाद - अब सरकार समाज के लिए कोई योजना शुरू करेगी तो यह सुनिश्चित करना आसान हो जायेगा कि उस particular योजना के लिए कौन-कौन पात्र है और सरकार खुद ही पात्रों से संपर्क करेगी।
2 . NPR की निर्बाधता खत्म होगी - राज्यों के पास डाटा होने की वजह से , पिछली बार 12 राज्यों ने NPR का हिस्सा बनाने से इंकार कर दिया था। अब उन पर आश्रित नहीं होना पड़ेगा।
3 . Clear database - समान्यत: ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति के मृत्यु के बाद भी उसके जरूरी कागजात बंद नहीं होते हैं। ऐसे में डाक्यूमेंट्स के गलत इस्तेमाल होने का डर बना रहता है। लेकिन इस संशोधन के बाद इस समस्या का भी निपटरा हो जयेगा।
4 . जनगणना नहीं होगी - हर महीने सारा डाटा update होने से केंद्र को 10 साल तक new data के लिए इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। सटीक आंकड़ों की updates सरकार के पास रहेगी और शायद 2022 की जनगणना आखिरी होगी।

क्या जनता के लिए भी प्रक्रिया में कोई बदलाव है ?
ज़ाहिर सी बात है की इतने बड़े संशोधन के बाद सबके मन में ये सवाल खड़ा हो रहा होगा की इससे आम जनता के लिए नई guideline क्या है। संशोधन के पहले इस कानून में यह व्यवस्था थी कि जन्म या मृत्यु होने पर जल्द से जल्द इसकी सुचना देकर प्रमाण पत्र लिया जाये। लेकिन अब इसकी time limit 7 दिन की रखी गई है।
इस कानून के लागु होने के बाद समय समय पर data को update किया जा सकेगा। इस Database की मदद से अन्य database को भी update करना मुमकिन हो सकेगा। इसका सीधा फायदा सरकार और जनता दोनों को मिलेगा। किसी भी योजना के लिए पत्रों का चयन सरकार के लिए आसान होगा और beneficiaries जिन्हे सच में उन योजनाओ की जरूरत है उन्हें सीधा benefit मिल सकेगा।


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