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AGRICULTURE

HARA BHARA PROJECT: तेलंगाना ने शुरू की ड्रोन बेस्ड वनरोपण परियोजना

by admin

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“Hara Bhara Project”, जैसा अनूठा नाम, वैसा अनूठा अभियान। हाल ही में तेलंगाना सरकार ने एरियल सीडिंग अभियान की शुरूआत की है। इस अभियान में सीडकॉप्टर ड्रोन की मदद से वनरोपण किया जाएगा। तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद स्थित ड्रोन प्रौद्योगिकी स्टार्टअप मारुत ड्रोन के साथ मिलकर इस अभियान की शुरूआत की है। इस अभियान के अंतर्गत राज्य सरकार, तेलंगाना के सभी 33 जिलों के जंगलों में 12,000 हेक्टेयर भूमि पर 50 लाख पेड़ लगाएगी। इस परियोजना के ब्रांड एंबेसडर एक्टर राणा दग्गुबाती हैं। यह अभियान तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के व़िजन के अनुरूप काम करके 'तेलंगाना कू हरिथा हराम' के तहत ग्रीन तेलंगाना के मिशन को गति देगा ।

अभियान का उद्देश्य

Hara-Bhara अभियान का मुख्य उद्देश्य वनीकरण में तेज़ी से वृद्धि करना है। इस अभियान का लक्ष्य देश में साल 2030 तक ड्रोन का उपयोग करके 100 करोड़ पेड़ लगाने का हैं। इस परियोजना के तहत क्षेत्र को हरा भरा बनाने के लिये संकीर्ण, बंजर और खाली वन भूमि पर ड्रोन का उपयोग करके सीड बॉल्स का छिड़काव किया जा रहा है।

क्या हैं 'सीडकॉप्टर'?

'सीडकॉप्टर' मारुत ड्रोन (Marut Drones) द्वारा विकसित एक ड्रोन है। यह ड्रोन तेज़ी से वनीकरण में वृद्धि करने के लिये एक एरियल सीडिंग तकनीक है। यह न केवल पर्यावरण के दुर्गम प्रभाव को बदलेगा, बल्कि ग्रामीण, आदिवासी और अन्य कमजोर समुदायों में महत्वपूर्ण रोजगार भी देगा। इसका मुख्य उद्देश्य वनीकरण के लिए मजबूत समुदायों का निर्माण करना हैं। साथ ही वनों की कटाई के प्रभावों पर लोगों मे जागरूकता लाना है।

एरियल सीडिंग कैसे करेगा काम?

एरियल सीडिंग, रोपण की एक तकनीक है। इसमें बीजों को मिट्टी, खाद, चारकोल और अन्य घटकों के मिश्रण में लपेटकर एक गेंद का आकार दिया जाता है। इसके बाद हवाई उपकरणों जैसे- विमानों, हेलीकाप्टरों या ड्रोन आदि का उपयोग करके इन गेंदों को लक्षित क्षेत्रों में छिड़काव किया जाता है। पर्याप्त बारिश होने पर ये बीज अंकुरित होते हैं, और इनमें मौजूद पोषक तत्त्व इनकी शुरूआती वृद्धि में मदद करते हैं।

प्रयोग करने में आसान

यह ड्रोन आसानी से ऐसे दुर्गम इलाकों को निशाना बना सकता है, जहां खड़ी ढलान या जंगल का रास्ता न होने के कारण पहुंचना मुश्किल हो। इन्हे जुताई या रोपण की आवश्यकता नही होती है क्योंकि इनमें मिट्टी, पोषक तत्व और सूक्ष्मजीव पहले से मौजूद रहते हैं। मिट्टी का खोल उन्हें पक्षियों, चींटियों और चूहों जैसे कीटों से भी बचाता है।

स्वच्छ वातावरण के लिए वन आवश्यक

आईटी, उद्योग और एमएयूडी मंत्री केटी रामा राव ने कहा, "मानव जीवन के लिए स्वच्छ और रहने योग्य वातावरण बनाए रखने के लिए वन आवश्यक हैं, और उभरती प्रौद्योगिकियों में वनीकरण प्रयासों का समर्थन करने की क्षमता है। नए उपयोग के मामलों के लिए ड्रोन का उपयोग करने में पहले से ही सबसे आगे होने के नाते, हम राज्य के सभी जिलों में बीज बोने और वन क्षेत्रों को बढ़ाने के लिए 'हरा-भरा' की शुरुआत कर रहे हैं।"

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